मेले का प्रथम अमृत स्नान 14 जनवरी 2027 को आयोजित होगा। 17 जनवरी से चलने वाला कुंभ मेला 30 अप्रैल को खत्म होगा। 107 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में 10 अमृत स्नान होंगे। इस बैठक में मेला प्रशासन की ओर से 13 अखाड़ों के दो-दो सचिव या नामित प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कुछ दिन पहले जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि महराज ने अर्धकुंभ को लेकर बयान जारी किए। जिससे अखाड़ों के संतों के साथ शासन प्रशासन में हड़कंप मच गया था। मेला प्रशासन ने किसी तरह से श्रीमहंत हरिगिरि को मनाने का प्रयास किया। जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी संतों के साथ शीघ्र ही बैठक करने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर मेला प्रशासन की ओर से बैठक 28 नवंबर को तय की गई। इसको लेकर मेला प्रशासन ने बृहस्पतिवार को सभी तैयारियां पूरी कर दी है। बैठक में सभी अखाड़ों के दो-दो प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। परंपरा के अनुसार के अनुसार कुंभ और अर्धकुंभ को लेकर होने वाली पहली बैठक में मुख्यमंत्री अखाड़ों के प्रतिनिधियों सुझाव मांगते हैं, साथ ही उन्हें और अखाड़ों से जुड़े सभी संतों को मेले में आने के लिए आमंत्रित करते हैं।
इस बैठक में भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अखाड़ों को आमंत्रित करने के साथ अर्धकुंभ को भव्य व दिव्य रूप से आयोजित करने के लिए सुझाव मांगें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही कह चुके हैं कि अर्धकुंभ को कुंभ की तरह भव्य व दिव्य रूप में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा इस बैठक में अखाड़ा परिषद को लेकर चल रही बयानबाजी पर भी विराम लगने की उम्मीद है।