पौड़ी में दो अनुभवी शिकारी तैनात – Param Satya – Parwatiya Sansar

पौड़ी में दो अनुभवी शिकारी तैनात – Param Satya

गढ़वाल वन प्रभाग की पौड़ी रेंज के ग्राम गजल्ख में 4 दिसंबर को गुलदार के हमले में 42 वर्षीय राजेंद्र नौटियाल की दर्दनाक मौत के बाद अब वन विभाग ने स्थिति को बेहद गंभीर मानते हुए निर्णायक कदम उठाए हैं। मानव जीवन के लिए खतरनाक घोषित किए जा चुके इस गुलदार को पकड़ने, ट्रैंक्युलाइज करने और अंतिम विकल्प के रूप में मारने तक की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एवं प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) रंजन कुमार मिश्र द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि गुलदार को पकड़ने के लिए वन कर्मियों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्र में पिंजरे लगाए गए हैं, ट्रैंक्युलाइज टीम सक्रिय है और दो विभागीय शिकारी भी तैनात किए गए हैं, लेकिन गुलदार अब तक पकड़ में नहीं आया है।

घटना के बाद उत्पन्न जनआक्रोश और सुरक्षा संकट को देखते हुए प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण, आयुक्त कुमाऊँ, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव), मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल, जिलाधिकारी पौड़ी और विभागीय अधिकारीयों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि गुलदार की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और गांव में खौफ का माहौल है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग सुरक्षा और गुलदार से मुक्ति दिलाने की है।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दो अनुभवी स्थानीय शिकारी – जॉय हयुकिल (चोपड़ा, पौड़ी) और राकेश चंद्र बड़थ्वाल (सेवानिवृत्त ADPO, पौड़ी) – को विभागीय शिकारियों की सहायता के लिए अनुमति दी जाए।

ये दोनों शिकारी:

क्षेत्र और भौगोलिक परिस्थितियों से भली-भांति परिचित

वन्यजीव नियंत्रण में अनुभवी

स्थानीय होने के कारण तुरंत कार्रवाई में सक्षम बताए गए हैं

इनकी नियुक्ति 18 दिसंबर 2025 तक की अवधि के लिए की गई है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है।

वन विभाग को सख्त निर्देश

डीएफओ गढ़वाल को निर्देशित किया गया है कि:

दोनों शिकारियों को शामिल कर एक संयुक्त टीम का गठन किया जाए

गुलदार को पकड़ने/कंट्रोल करने की कार्रवाई में तेजी लाई जाए

पूरी प्रक्रिया का नियमित अनुश्रवण किया जाए

क्षेत्र में सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं

ग्रामीणों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद

लगातार हो रही गुलदार गतिविधियों से भयभीत ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि अनुभवी शिकारियों की तैनाती और उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग के बाद जल्द ही इस खतरे से मुक्ति मिल सकेगी। वन विभाग का कहना है कि लक्ष्य केवल ग्रामीणों की सुरक्षा है और सभी प्रयास कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत किए जा रहे हैं।





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