देहरादून कारगी डंपिंग जोन पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सख्त, डीएम से मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट

कारगी चौक स्थित डंपिंग जोन को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सख्त रुख अपनाया है. देहरादून निवासी मनीष गुप्ता की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने 19 जून को जिलाधिकारी देहरादून को पत्र भेजकर चार हफ्ते के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है. आयोग का कहना है कि शहर के बीचों-बीच, आईएसबीटी, स्कूलों, घनी आबादी और हाईवे के पास स्थित यह डंपिंग जोन लोगों के स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है.

बता दें कि देहरादून के कारगी चौक स्थित डंपिंग जोन को लेकर अब राष्ट्रीय स्तर पर मामला पहुंच गया है. शहर के बीचों-बीच संचालित इस डंपिंग ग्राउंड पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गंभीर चिंता जताते हुए जिला प्रशासन से एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है. आयोग ने देहरादून के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर चार हफ्ते के भीतर इस मामले में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.

फोटो सोर्स- Dm Office Dehradun

यह कार्रवाई देहरादून निवासी मनीष गुप्ता की ओर से की गई शिकायत के आधार पर की गई है. शिकायत में कहा गया था कि कारगी चौक के पास स्थित डंपिंग जोन घनी आबादी, स्कूलों और आईएसबीटी के बेहद करीब है. इसके कारण आसपास रहने वाले लोगों को दुर्गंध, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही यह डंपिंग जोन राष्ट्रीय राजमार्ग से भी सटा हुआ है, जिससे शहर की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पत्र का संज्ञान लेते हुए देहरादून जिलाधिकारी ने नगर निगम देहरादून के अपर नगर आयुक्त से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. अब नगर निगम को यह बताना होगा कि डंपिंग जोन को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और भविष्य में इसे स्थानांतरित करने की क्या योजना है?

कारगी डंपिंग जोन का मुद्दा कोई नया नहीं है. पिछले कई सालों से स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन इसके विरोध में आवाज उठाते रहे हैं. विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस, भी समय-समय पर इस डंपिंग ग्राउंड को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करती रही है. बावजूद इसके अब तक डंपिंग जोन को स्थानांतरित करने की दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है.

देहरादून नगर निगम भी लंबे समय से वैकल्पिक स्थान की तलाश और अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देता रहा है, लेकिन आज तक डंपिंग जोन को शिफ्ट नहीं किया जा सका. इस बीच आसपास के क्षेत्र में आबादी लगातार बढ़ी है और लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी गहराती गई हैं. अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है,. आयोग की ओर से मांगी गई एक्शन टेकन रिपोर्ट के बाद यह उम्मीद जरूर जगी है कि सरकार और नगर निगम इस मामले में गंभीरता से कदम उठाएंगे.





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