उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। डीजीसीए (DGCA – नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) और यूकाडा (UCADA – उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण) ने चारधाम की सभी चार्टर्ड हेलीकॉप्टर उड़ानों में 2 पायलट (पायलट और को-पायलट) का होना अनिवार्य कर दिया है। इस नए नियम के लागू होते ही हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने कड़ा विरोध जताया है और चेतावनी दी है कि वे सोमवार से अपनी सेवाएं पूरी तरह ठप कर देंगे। ऑपरेटरों का कहना है कि बिना किसी सलाह के अचानक थोपा गया यह फैसला उनके लिए आर्थिक रूप से घाटे का सौदा है और इससे उड़ानें चलाना व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाएगा।
गौरतलब है कि हाल ही में 30 अक्टूबर को उत्तराखंड के जोशीमठ में एक बड़ा हेलीकॉप्टर हादसा हुआ था, जिसमें पायलट समेत कुल 6 लोगों की जान चली गई थी। इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन और नागरिक उड्डयन विभाग हरकत में आया। शनिवार को डीजीसीए और यूकाडा की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया कि अब से हर चार्टर हेलीकॉप्टर में दो पायलटों का होना बेहद जरूरी होगा। इसके साथ ही प्रशासन ने एक और सख्त कदम उठाते हुए दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर वाली कंपनी ‘ट्रांस भारत’ की सभी उड़ानों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। हालांकि, जिन यात्रियों ने इस कंपनी के जरिए पहले से बुकिंग करा रखी थी, उन्हें राहत देते हुए यूकाडा के सीईओ प्रतीक जैन ने साफ किया कि उन्हें दूसरी कंपनियों की हेली सेवाओं में समायोजित (अडजस्ट) किया जाएगा।
दूसरी ओर, हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने इस नए नियम के खिलाफ एकजुट होकर विमानन नियामकों को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। ऑपरेटरों ने मांग की है कि इस आदेश की तुरंत समीक्षा की जाए और सभी पक्षों की सहमति से कोई बीच का रास्ता निकाला जाए।ऑपरेटरों का कहना है कि इससे खर्च में भारी बढ़ोतरी होगी। एक के बजाय दो पायलट रखने से चालक दल (क्रू) का खर्च, उनके रहने-खाने का इंतजाम और लॉजिस्टिक्स का बजट काफी बढ़ जाएगा। आर्थिक रूप से नुकसान होगा। मौजूदा दरों पर दो पायलटों के साथ उड़ानें संचालित करना कंपनियों के लिए वित्तीय रूप से बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं रहेगा। ऑपरेटरों ने साफ कह दिया है कि जब तक अधिकारी इस फैसले पर दोबारा विचार नहीं करते और कोई सर्वमान्य समाधान नहीं निकलता, तब तक वे सोमवार से अपनी चारधाम चार्टर्ड सेवाओं को निलंबित रखेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ऑपरेटरों ने 30 अक्टूबर को हुए जोशीमठ हादसे के कारणों पर भी सवाल खड़े किए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक ऑपरेटर ने दावा किया कि हादसे के समय के वीडियो में मौसम बिल्कुल साफ और विजिबिलिटी एकदम ठीक दिखाई दे रही है। इसलिए खराब मौसम को हादसे की वजह मानना पूरी तरह सही नहीं है। ऑपरेटर के मुताबिक हेलीकॉप्टर के अचानक गिरने के पीछे दो ही मुख्य कारण हो सकते हैं—या तो उड़ान के दौरान पायलट को अचानक कोई गंभीर मेडिकल इमरजेंसी आई हो, या फिर आसमान में हेलीकॉप्टर से कोई बाहरी चीज टकराई हो।
ऑपरेटरों ने आरोप लगाया है कि मंदिर मार्गों और संवेदनशील उड़ान क्षेत्रों में ड्रोन और पैराग्लाइडिंग गतिविधियों को लेकर उन्होंने कई बार यूकाडा से शिकायत की थी, लेकिन उनकी चेतावनियों को बार-बार नजरअंदाज किया गया। एक ऑपरेटर ने बताया, “जोशीमठ हादसे वाले दिन भी भारतीय सेना की तरफ से एक नोटम (NOTAM – Notice to Air Missions) जारी किया गया था। जोशीमठ में सेना की अच्छी-खासी मौजूदगी है, फिर भी सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरती गई।
इस समय केदारनाथ और अन्य धामों के लिए थंबी, राजस, पिलग्रिमेज एविएशन, एयरो एयरक्राफ्ट और हिमालयन हेली जैसी कई अन्य कंपनियां अपनी सेवाएं दे रही हैं। प्रशासन ने सभी को खराब मौसम और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन अगर ऑपरेटरों और प्रशासन के बीच 2-पायलट वाले नियम को लेकर जल्द समझौता नहीं हुआ, तो सोमवार से चारधाम आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।