भू बैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट आज विधि विधान के साथ बंद कर दिए गए। इसी के साथ इस वर्ष के लिए चारधाम यात्रा का समापन हो गया है। दोपहर ठीक 2 बजकर 56 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ शीतकाल के बदरीनाथ धाम के कपाट बंद हुए। इस दौरान प्रांगण में करीब 5000 श्रद्धालु मौजूद रहे। सेना के बैंड का मधुर धुन के बीच बदरी विशाल की जय के उद्घोष के साथ भगवान उद्धव,कुबेर जी की मूर्ति और शंकराचार्य जी की गद्दी को शीतकालीन प्रवास स्थल के लिए रवाना किया गया।
कपाट बंद होने पर मंदिर को 10 कुंतल गेंदे के फूलों से सजाया गया था। बदरीनाथ धाम में 21 नवंबर से पंच पूजाएं शुरू हो गई थी। गणेश मंदिर, आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी स्थल के कपाट बंद होने के बाद धाम में वेद ऋचाओं का वाचन भी समाप्त हो गया था। सोमवार को माता लक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजाओं के साथ पंच पूजाओं की श्रृंखला पूरी हो गई। आज रावल (मुख्य पुजारी) ने माता लक्ष्मी मंदिर में जाकर उन्हें बदरीनाथ गर्भगृह में विराजमान होने के लिए आमंत्रण दिया। जिसके बाद गृत कंबल लपेटकर कपाट बंद कर दिए गए। अगले वर्ष कपाट खुलने तक माता लक्ष्मी मंदिर परिक्रमा स्थल पर स्थित मंदिर में विराजमान रहेंगी।
इस बार केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं ने रिकॉर्ड बनाया है। बीते वर्ष केदारनाथ धाम में 16.51 लाख व बदरीनाथ धाम में 14.35 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इस बार केदारनाथ में 17.68 लाख से अधिक व बदरीनाथ धाम में 16.53 लाख दर्शन कर चुके हैं। उत्तरकाशी जिले में आपदा के कारण यमुनोत्री व गंगोत्री धाम की यात्रा प्रभावित रहने से श्रद्धालुओं की संख्या में कम रही। बावजूद इसके चारधामों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 51 लाख पहुंच गया । जबकि पिछले साल 48 लाख ने दर्शन किए थे।